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क्या India में है content writers की कमी?

भारत की वर्तमान जनसंख्या 140 करोड़ हैं जो USA की जनसंख्या के चार गुना से भी अधिक है। जनसँख्या के साथ-साथ भारत में साँस्कृतिक भिन्नता भी बहुत अधिक है।

भारत में भाषायें और बोलियाँ भी दुनिया के किसी भी देश से अधिक बोली जाती हैं। कुछ लोग समझते तो 1 से अधिक भाषायें हैं लेकिन बोलते केवल 1 ही भाषा हैं।

यही कारण है कि भारत में इतने अधिक लोगों के लिये अपनी बात को आगे पहुँचाने तक या कोई बात इन लोगों तक पहुँचाने के लिये बहुत अधिक मात्रा में content writers और content creators की आवश्यकता है।

भारत में किसी एक भाषा में उपलब्ध बात को दूसरी भाषा को समझने वाले लोगों तक पहुँचाने के लिये भी किसी Content writers की आवश्यकता है। चाहें देश के content को देश की ही विभिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराना हो या विदेश के Content को देश की भिन्न-भिन्न भाषाओं में उपलब्ध कराना हो। इन सभी कामों के लिये Content writers की आवश्यकता है।

भारतीय वस्तुओं की जानकारी को विदेशी उपभोक्ताओं तक पहुँचाना-
भारत में कुछ ऐसी चीजों का निर्माण भी होता है जो दुनिया के अन्य देशों के लिये दुर्लभ हैं। इसके अलावा भारत में कई चीजों के निर्माण को कई बढ़ाकर कई गुना भी किया जा सकता है लेकिन जरूरत है तब केवल इन उत्पादों का उपभोग करने वालों की।

भारत के writers ऐसे ही वस्तुओं या उत्पादों की जानकारी को लिखकर देश-विदेश में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा सकते हैं। जब इन उत्पादों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचेगी तब बेशक इनकी demand बढ़ेगी और जब इनकी demand बढ़ेगी तब बेशक इन उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी।

प्राचीन भारतीय ग्रंथों का वर्तमान भाषाओं में अनुवाद-
भारत हमेशा से ही ज्ञान के क्षेत्र में बेजोड़ रहा है। भारत में प्राचीन समय में ही ऐसे-ऐसे ग्रंथ लिखे जा चुके हैं जो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ ज्ञान के स्त्रोत हैं। लेकिन कई कारणों से उनका अनुवाद हो नहीं पा रहा है। इनमें से जो मुख्य कारण है वह है भारत में लेखकों और अनुवादकों की कमी होना।

विदेशों में लिखी किताबों को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराना-
विदेशी भाषाओं में बहुत अधिक मात्रा में प्रतिदिन नई-नई किताबें पब्लिश होती हैं। इनमें से कुछ किताबें तो गूढ़ ज्ञान का सर्वश्रेष्ठ स्त्रोत होती हैं लेकिन दुर्भाग्य ये किताबें भारतीय भाषाओं को समझने वाले लोगों के लिये उपलब्ध हो ही नहीं पाती। ऐसी किताबों का अधिक से अधिक अनुवाद के लिये भारत में बहुत से लेखकों की आवश्यकता है।

 

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